“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग...
Read moreDetailsराष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए...
Read moreDetailsराष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य समावेशी और उत्कृष्टता के दोहरे उद्देश्यों को प्राप्त करके 21वीं सदी की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करना है। यह सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करके एक समतामूलक और जीवंत ज्ञानवान समाज विकसित करने का दृष्टिकोण निर्धारित करती है। राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने उच्च शिक्षा में 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन' पर आगंतुकों के सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में आज यह बात कही। राष्ट्रपति ने नई शिक्षा नीति तैयार करने वाले शिक्षा मंत्रालय तथा डॉ. कस्तूरीरंगन और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। श्री कोविंद ने उल्लेख किया कि, 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 12,500 से अधिक स्थानीय निकायों और लगभग 675 जिलों की व्यापक भागीदारी तथा दो लाख से अधिक सुझावों पर विचार के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार की गई है जो कि जमीनी स्तर की सोच और समझ को दर्शाता है। उच्च शिक्षा संस्थानों को प्रोत्साहित करते हुए, राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि इन संस्थाओं पर भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की अधिक जिम्मेदारी है। इनके द्वारा स्थापित मानदण्डों के रूप में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन अन्य संस्थानों द्वारा किया जाएगा। राष्ट्रपति ने जोर दिया कि नई नीति के बुनियादी सिद्धांतों में तार्किक निर्णय लेने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए रचनात्मकता तथा महत्वपूर्ण सोच शामिल है। उन्होंने शिक्षक और छात्र के बीच मुक्त संचार तथा चर्चा की अवधारणा को दोहराते हुए भगवद गीता और कृष्ण-अर्जुन संवाद से प्रेरणा लेने के महत्व को भी रेखांकित किया। श्री कोविंद ने कहा कि नई शिक्षा नीति महत्वपूर्ण सोच और अनुसंधान करने की भावना को प्रोत्साहित करने का प्रयास भी करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों के समय पर रहे ऐतिहासिक भारतीय गौरव के एक बार फिर से पुनर्स्थापित होने की संभावना है। राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहा कि यह अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट प्रणाली को भी पेश करेगी। इससे विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों से अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट डिजिटल रूप से संग्रहीत होगा ताकि छात्रों द्वारा अर्जित क्रेडिट को ध्यान में रखते हुए डिग्री प्रदान की जा सके। इसके अतिरिक्त छात्रों को उपयुक्त निकास और पुन: प्रवेश लेने के लचीलेपन के साथ-साथ उनकी पेशेवर, व्यावसायिक या बौद्धिक आवश्यकताओं के अनुसार उन्हें पाठ्यक्रम चुनने की स्वतंत्रता भी मिलेगी। श्री कोविंद ने कहा कि इस नीति में बी.एड,...
Read moreDetailsभारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने आज प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 31(1) के तहत इंटरनेशनल फ्लेवर्स और फ्रैगनेनसिस आईएनसी. (आईएफएफ)...
Read moreDetailsभारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (पीसी) प्रदान करने की जांच के लिए गठित विशेष नंबर 5 चयन...
Read moreDetailsकोविड-19 के खिलाफ जंग में एक उल्लेखनीय मदद करते हुए राष्ट्रीय खनन कंपनी कोल इंडिया की इकाई नॉर्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने...
Read moreDetailsश्री संजय धोत्रे, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा राज्यमंत्री, भारत सरकार ने 17 सितंबर, 2020 को आभासी प्रारूप में आयोजित ब्रिक्स संचार मंत्रियों की...
Read moreDetailsकेंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम राजीवन ने कहा, 'इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की व्यापकता और प्रसार ने...
Read moreDetailsअंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) द्वारा कल दोपहर (8 सितंबर, 2020, साढ़े चार बजे) पहला विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसटीएस) आयोजित किया जा रहा...
Read moreDetailsप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस सम्मेलन...
Read moreDetails© 2025 Gujarat Patrika - Developement and Design Right reserved by Gujarat Patrika.
© 2025 Gujarat Patrika - Developement and Design Right reserved by Gujarat Patrika.