“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
अदरक, इलायची और ज्यादा शक्कर ऊपर से डाल कर चाहत भी लाए, काश वो थोड़ा इश्क़ जताए, आज वो मेरे ...
Read moreDetailsअक्सर तुम्हें खोने के ख़्याल से इतना डर जाती हूं मैं, लिपट कर तुम्हारी यादों से गहरी नींद सो जाती ...
Read moreDetailsठंड में कितना भी आसरा लो लिहाफ का, कम्बख़त चाय के लिए जां तलबगार रहती है लिपट जाते तुम भी ...
Read moreDetailsवो मिल जाए मुझे इतवार सा, फ़ुरसत में किया जाए ऐसे इंतजार सा। गर्म एहसासों को ले बैठेंगे दोनों, कुल्हड़ ...
Read moreDetailsप्रेम : कहां रहती हो तुम?? मैं : रेगिस्तान में !! सुलगती रेत के साथ सुनकर तंग लकीरें खींच गई ...
Read moreDetailsतुम्हारा ख़त मिला, बहुत सुंदर लिखा है पर तुम ख़त क्यों लिखती हो हर बार??? तुमने पुछा था कभी, और ...
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