“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
ढल गई फिर शाम देखो ढह गया दिन भूल जाती है सुबह, सुबह निकलकर और दिन दिनभर पिघलता याद में। ...
Read moreDetailsडालियों के द्वंद में रोया हुआ पंछी, कोपलों के आगमन पर क्रुद्ध होता है। एक दिन था जब यही जंगल ...
Read moreDetailsतन नौका में सवार मन की मनमानी में। स्वप्न हो गये नाविक जीवन के पानी में। मन कभी सुझाता है ...
Read moreDetailsदीप बेचारा बुझा क्या सब पतंगे उड़ गए। अब अँधेरे के नगर में बातियों की अस्थियाँ ताकती हैं जल-कलश को ...
Read moreDetailsअभिलाषाओं के दिवास्वप्न पलकों पर बोझ हुए जाते फिर भी जीवन के चौसर पर साँसों की बाज़ी जारी है। हारा ...
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