“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
तसव्वुर के सहारे यूँ शब-ए-ग़म ख़त्म की मैं ने जहाँ दिल की ख़लिश उभरी तुम्हें आवाज़ दी मैं ने तलब ...
Read moreDetailsवक़्त जब करवटें बदलता है फ़ितना-ए-हश्र साथ चलता है मौज-ए-ग़म से ही दिल बहलता है ये चराग़ आँधियों में जलता ...
Read moreDetailsउम्र गुज़री है इल्तिजा करते क़िस्सा-ए-ग़म लब-आशना करते जीने वाले तेरे बग़ैर ऐ दोस्त मर न जाते तो और क्या ...
Read moreDetailsमुद्दतों से कोई पैग़ाम नहीं आता है जज़्बा-ए-दिल भी मेरे काम नहीं आता है है अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल के दम-ए-ज़िक्र-ए-वफ़ा याद उन ...
Read moreDetailsलब पे काँटों के है फ़रियाद-ओ-बुका मेरे बाद कोई आया ही नहीं आबला-पा मेरे बाद मेरे दम तक ही रहा ...
Read moreDetailsहर साँस में ख़ुद अपने न होने का गुमाँ था वो सामने आए तो मुझे होश कहाँ था करती हैं ...
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