मुझे उदास कर गये हो, ख़ुश रहो
मिरे मिज़ाज पर गये हो, ख़ुश रहो
मिरे लिये न रुक सके तो क्या हुआ
जहाँ कहीं ठहर गये हो, ख़ुश रहो
ख़ुशी हुई है आज तुमको देखकर
बहुत निखर-सँवर गये हो, ख़ुश रहो
उदास हो किसी की बेवफ़ाई पर
वफ़ा कहीं तो कर गये हो, ख़ुश रहो
गली में और लोग भी थे आश्ना
हमें सलाम कर गये हो, ख़ुश रहो
तुम्हें तो मेरी दोस्ती पे नाज़ था
इसी से अब मुकर गये हो, ख़ुश रहो
किसी की ज़िंदगी बनो कि बंदगी
मिरे लिए तो मर गये हो, ख़ुश रहो।
© Fazil Jamili





















