फर्टिलिटी क्लीनिक में अक्सर ऐसे कपल्स आते हैं, जिन्हें दो या उससे अधिक बार गर्भपात (Miscarriage) का सामना करना पड़ा हो। ऐसी स्थिति में अक्सर महिला की सभी ब्लड रिपोर्ट, स्कैन और हार्मोनल टेस्ट हो चुके होते हैं, जबकि पुरुष पार्टनर की कोई खास जांच नहीं हुई होती है। चूँकि गर्भधारण हो चुका होता है, इसलिए कपल्स को लग सकता है कि इसमें शुक्राणु (Sperm) की कोई भूमिका नहीं हो सकती। लेकिन, गर्भधारण होना और गर्भ का टिके रहना—ये दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं।
बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, अहमदाबाद की फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. निमिषा शांतिलाल पंड्या के अनुसार, जब गर्भपात होता है, तो स्वाभाविक रूप से मेडिकल ध्यान महिला पर ही अधिक केंद्रित होता है क्योंकि उसने गर्भ धारण किया होता है। हालाँकि, बार-बार होने वाले गर्भपात के मूल कारणों को हमेशा केवल महिला की जांच करके नहीं समझा जा सकता है।
डॉक्टर पुरुष पार्टनर में किन बातों की जांच कर सकते हैं?
सीमेन एनालिसिस (Semen Analysis – वीर्य की जांच) एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। यह शुक्राणुओं की संख्या (Concentration), उनकी गतिशीलता और उनके आकार (Morphology) का मूल्यांकन करता है। लेकिन यह शुक्राणुओं के आंतरिक आनुवंशिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी नहीं देता है। एक पुरुष की वीर्य रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद भी, उसमें गर्भपात से जुड़े अन्य कारक मौजूद हो सकते हैं।
१. क्रोमोसोमल पुनर्रचना (Chromosomal Rearrangement): बार-बार गर्भपात का सामना करने वाले कुछ प्रतिशत कपल्स में, दोनों में से किसी एक पार्टनर में ‘बैलेंस्ड क्रोमोसोमल ट्रांसलोकेशन’ (Balanced Chromosomal Rearrangement) जैसी स्थिति हो सकती है। आम तौर पर व्यक्ति स्वयं पूरी तरह से स्वस्थ होता है, लेकिन उसके कुछ शुक्राणुओं में असंतुलित क्रोमोसोम हो सकते हैं। यदि ऐसा शुक्राणु अंडे (Egg) को निषेचित करता है, तो भ्रूण (Embryo) में क्रोमोसोमल असामान्यता उत्पन्न हो सकती है, जो गर्भपात का कारण बन सकती है।
२. स्पर्म डीएनए फ्रेगमेंटेशन (Sperm DNA Fragmentation): स्पर्म डीएनए फ्रेगमेंटेशन का अर्थ है शुक्राणु के अंदर मौजूद डीएनए (DNA) को हुआ नुकसान। जिन पुरुषों की पार्टनर को अक्सर गर्भपात होता है, उनमें डीएनए क्षति का स्तर अधिक देखा गया है। ऐसे शुक्राणु से निषेचन (Fertilisation) तो हो जाता है, लेकिन डीएनए का नुकसान भ्रूण के सामान्य विकास को प्रभावित कर सकता है। यह टेस्ट आम तौर पर हर कपल के लिए नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार ही किया जाता है।
३. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और जीवनशैली से जुड़े कारक: ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस शुक्राणु की सतह और डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है। धूम्रपान, बहुत अधिक शराब का सेवन, मोटापा (Obesity), पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ, संक्रमण, वैरीकोसेल (Varicocele) और पुरुष की बढ़ती उम्र इन कारकों में योगदान कर सकते हैं।
जांच के दौरान जो भी कारण सामने आता है, उसके आधार पर उपचार तय किया जाता है। इसमें जीवनशैली में बदलाव, मूल समस्या का इलाज, जेनेटिक काउंसलिंग, पुरुष प्रजनन विशेषज्ञ की सलाह या आवश्यकतानुसार असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक (ART/IVF) शामिल हो सकती है।
दोनों पार्टनर्स की जांच करने का अर्थ यह नहीं है कि गर्भपात पुरुष के कारण ही हुआ है। इस जांच से डॉक्टर बार-बार होने वाले गर्भपात को केवल महिला पर बोझ बनाने के बजाय, इसे कपल के संयुक्त प्रजनन स्वास्थ्य के मुद्दे के रूप में देख सकते हैं और इसका उचित समाधान निकाल सकते हैं।





























