“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
धड़कते दिल की तमन्ना हो, मेरा प्यार हो तुम मुझे क़रार नहीं, जब से बेक़रार हो तुम खिलाओ फूल किसी...
Read moreDetailsआपसे प्यार हुआ जाता है खेल दुश्वार हुआ जाता है दिल जो हर क़ैद से घबराता था ख़ुद गिरफ़्तार हुआ...
Read moreDetailsये किस तरह याद आ रही हो ये ख़्वाब कैसा दिखा रही हो कि जैसे सचमुच निगाह के सामने खड़ी...
Read moreDetailsये बुझी सी शाम ये सहमी हुई परछाइयाँ ख़ून-ए-दिल भी इस फ़ज़ा में रंग भर सकता नहीं आ उतर आ...
Read moreDetailsराम बन-बास से जब लौट के घर में आए याद जंगल बहुत आया जो नगर में आए रक़्स-ए-दीवानगी आँगन में...
Read moreDetailsतुम्हारे नाम पर मैं ने हर आफ़त सर पे रक्खी थी नज़र शो'लों पे रक्खी थी ज़बाँ पत्थर पे रक्खी...
Read moreDetailsवो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे चाँद कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से...
Read moreDetailsदोस्त ! मैं देख चुका ताजमहल ...वापस चल मरमरीं-मरमरीं फूलों से उबलता हीरा चाँद की आँच में दहके हुए सीमीं...
Read moreDetailsअहमदाबाद शहर हमेशा साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों के लिए जाना जाता है। हाल ही में, अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटरेचर...
Read moreDetailsलो पौ फटी वो छुप गई तारों की अंजुमन लो जाम-ए-महर से वो छलकने लगी किरन खिंचने लगा निगाह में...
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