“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
दोस्ती जब किसी से की जाये| दुश्मनों की भी राय ली जाये| मौत का ज़हर है फ़िज़ाओं में, अब कहाँ...
Read moreDetailsइश्क में पीट के आने के लिए काफी हूँ मैं निहत्था ही ज़माने के लिए काफी हूँ हर हकीकत को...
Read moreDetailsगृह मंत्रालय ने दुकानों को खोलने की अनुमति देने के लिए लॉकडाउन उपायों पर जारी समेकित संशोधित दिशा-निर्देशों में संशोधनों...
Read moreDetailsमुझे कविता नहीं आती.. मैं तो बस कलम में तुम्हारे ख़यालो की श्याही भरती हूँ.. और फिर.. अल्फ़ाज़ टपकतें रहतें...
Read moreDetailsशीर्षक : उन्हें वो चीखें सुनके अफसोस हो रहा था अपने फेसले पे वो बाप भी रो रहा था ।...
Read moreDetailsतुलसीदास जी जब “रामचरितमानस” लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी: 💝सिय राम मय सब जग जानी, करहु प्रणाम...
Read moreDetailsमेरे दोस्तों, माँ-बाप, सभी मज़हब, मेरा निर्जीव समाज! मैं आप सबसे बहुत मोहब्बत करता हूँ! आप लोगो के लिए ही...
Read moreDetailsएक बार एक बंदर को उदासी के कारण मरने की इच्छा हुई, तो उसने एक सोते हुए शेर के कान...
Read moreDetailsथू जो थूक सकते हैं किसी पर, थू है उनकी जिंदगी पर। नग्नता को जो शस्त्र बनाएं, थू है उनकी...
Read moreDetailsहे नारी ! तुम नारायणी ,जगदंबा भवानी हो। तुम्ही ही तो हो कल्यानकारी देवी। तुम चाहो तो धरती पर स्वर्ग...
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