राष्ट्रीय

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय ने आज स्कूलों को फिर से खोलने के लिए एसओपी/दिशा-निर्देशों को जारी किया

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय ने आज स्कूलों को दोबारा खोलने के लिए एसओपी/दिशा-निर्देशों को जारी किया है। केंद्रीय...

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हमारी सरकार द्वारा वैज्ञानिक डेटा साझा करने पर सबसे अधिक ध्यान दिया गया: प्रो. आशुतोष शर्मा, एसटीएस फोरम में डीएसटी सचिव

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव प्रो. आशुतोष शर्मा ने भारत द्वारा वैज्ञानिक आंकड़ों को साझा करने पर अधिक ध्यान...

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‘जल जीवन मिशन’ की योद्धा ने सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से अपने गांव को बदल कर रख दिया

यह सुश्री कुलविंदर कौर बरार के लिए एक बड़ी व्यस्त सुबह है। यहां तक कि जैसे-तैसे वह जल्दी से अपने घर के कामों को निपटाती हैं, लेकिन उनका ध्यान आगे दिन भर की बैठकों पर भी होता है। उनका सारा दिन हितधारकों, सरकारी अधिकारियों, कॉरपोरेट्स, एनआरआई और सबसे महत्वपूर्ण अपनी टीम के साथ मिलने-जुलने और चर्चा करने में व्यस्त रहेगा। कुलविंदर का जीवन किसी भी अन्य अधिकारी की तरह ही है, लेकिन एक अपवाद के तौर पर। वह पंजाब के बठिंडा जिले के मेम्हा भगवाना गाँव की सरपंच हैं, जिन्होंने आज के दौर की कार्यशैली को अपने जीवन में अच्छे से आत्मसात किया है। बचपन से ही कुलविंदर ने गाँव की महिलाओं को गाँव में पीने योग्य पानी की कमी के कारण परेशान होते देखा है। कुलविंदर इस स्थिति को बदलने के लिए संकल्पबद्ध थीं और गाँव का सरपंच बनने के तुरंत बाद उन्होंने एक सकारात्मक दृष्टिकोण से इस समस्या की ओर काम करना शुरू कर दिया। इस मामले में उनका विचार और इरादा बहुत शानदार था, लेकिन उन्हें इसकी शुरुआत करने के लिए भारी धन की आवश्यकता थी। हालांकि जल जीवन मिशन की शुरुआत होने के साथ ही यहां चीजें बहुत अधिक सुव्यवस्थित हो गईं और जल्द ही मेम्हा गांव के प्रत्येक घर में पानी उपलब्ध कराने के लिए नलके से जल योजना को मंजूरी दी गई। मिशन को और आगे ले जाने के लिए ग्राम जल और स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) के सदस्य घर-घर जाकर यह समझाते हैं कि कैसे पाइप द्वारा की गई जलापूर्ति से न केवल समय और ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि निर्धारित गुणवत्ता का स्वच्छ पेयजल भी उपलब्ध होगा। योजना के ब्योरे से उन स्थानों पर ज़रूर अवगत कराया गया, जहां गाँव के बुनियादी ढाँचे के लिए 10% पूंजीगत व्यय का योगदान करने की आवश्यकता है। सभी परिवारों को योगदान करने और एक नल कनेक्शन प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि उन्हें कृषि कार्यों के लिए दिन के दौरान अधिक समय मिले। अधिकांश लोग पानी के कनेक्शन प्राप्त करने के लिए पैसे का भुगतान करने के लिए सहमत हुए क्योंकि पानी की उपलब्धता एक गंभीर चिंता थी। लेकिन गाँव में कुछ घर ऐसे भी थे जो योगदान नहीं दे सकते थे। ग्राम पंचायत ने उनके शुल्क को माफ करने का निर्णय लिया। उनके घरों में नल कनेक्शन का खर्च पंचायत द्वारा वहन किया गया था। आज किसी भी नए पानी के नल कनेक्शन के लिए वीडब्ल्यूएससी शुल्क सामान्य घर से 500 रुपये और अनुसूचित जाति वाले घरों से 250 रुपये लिया जाता है। अगला लक्ष्य पंचायत की बैठकों में नियमित रूप से पानी का मुद्दा उठाना था। इस विचार को लागू करने में पितृसत्ता मुख्य बाधा थी। हालांकि कुलविंदर सरपंच के रूप में ग्राम पंचायत का नेतृत्व करती हैं, लेकिन बहुत कम महिलाएं थीं जो वास्तव में ग्राम सभा की बैठक में शामिल होती थीं। महिलाओं को संगठित करना एक कठिन कार्य था। आज लगभग 80% महिलाएं ग्राम सभा में हिस्सा लेती हैं और अपनी चिंताओं को साझा करती हैं। एक महिला को इस तरह के ज्वलंत मामलों के निपटारे के लिए शीर्ष पर काम करता देखकर उन महिलाओं में भी आत्मविश्वास पैदा होता है, जो अधिक सहभागी हैं और नेतृत्व की भूमिका निभाने को तैयार हैं। जल जीवन मिशन का आईईसी अभियान समुदाय को संचालित करने में एक बड़ी मदद थी। महिलाओं की भूमिका और जल प्रबंधन में उनका महत्वपूर्ण योगदान इस अभियान का हिस्सा था। नियमित रूप से जागरूकता लाने के लिए गाँव में एक महिला ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन किया गया था क्योंकि गाँव की महिलाएँ मानती हैं कि वे घर चलाने वाली महिलाएँ हैं, इसलिए वे ही पानी का बेहतर प्रबंधन कर सकती हैं। जल जीवन मिशन को धन्यवाद! गाँवों में एक मौन क्रांति हो रही है। पाइप के पानी के कनेक्शन ने महिलाओं के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्हें पानी ढूंढ कर और ढोकर लाने के दंश से बचाया गया है। घर पर पानी का एक नल होने से, महिलाओं को अब अधिक समय मिलता है। एक अन्य प्रमुख बदलाव यह सामने आया है कि गांव में पाइप से पानी का कनेक्शन पहुंचने के बाद से पढाई छोड़ने की दर कम हो गई है। कई किशोरों ने स्कूलों में फिर से दाखिला लिया है। पंचायत में एक पाँच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है जो समय-समय पर गाँव में आपूर्ति किये जाने वाले पानी की शुद्धता और मानक का आकलन करने के लिए जल स्रोत तथा घरेलू नल कनेक्शन का परीक्षण करती है। पेयजल आपूर्ति से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए गांव में कुशल राजमिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर उपलब्ध हैं, वहीं अब महिलाओं को भी मामूली मरम्मत कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि मौजूदा बुनियादी ढांचे को बनाए रखा जा सके। आज मेम्हा भगवाना गाँव सामुदायिक भागीदारी और जेजेएम योजना से लाभान्वित होने का एक आदर्श उदाहरण है, जहाँ गाँव में 100 प्रतिशत कार्यात्मक घरेलू पानी का कनेक्शन है और इसे 1,484 लोगों की आबादी के लिए सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है, जिसका अनुकरण अन्य गाँव कर सकते हैं। हालांकि कुलविंदर कौर के लिए, यह यात्रा अभी शुरू हुई है, क्योंकि वह अब गांव में ग्रे वाटर मैनेजमेंट और सोलर लाइट लगाने की दिशा में काम करने की योजना बना रही है। उनके नेतृत्व में गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र देखने की अन्य योजनाएँ हैं। वह स्वयं सहायता समूह की छत्रछाया में गांव की महिलाओं को जुटाने की कोशिश में हैं। वह कहती हैं, 'मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि गांव की ये महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के लिए कुछ लाभकारी आर्थिक गतिविधियां करें और परिवार की भलाई में अपना योगदान दें।' सरकार का प्रमुख कार्यक्रम, जल जीवन मिशन 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में पीने का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्यों के साथ साझेदारी में चल रहा है। पिछले एक साल में, देश के 2.30 से अधिक करोड़ घरों में नल से जल कनेक्शन पहले से ही उपलब्ध कराया जा चुका है। अब तक 5.50 करोड़ परिवारों यानी कि लगभग 30% कुल ग्रामीण परिवारों को अब अपने घरों में सुरक्षित नल का पानी मिलने का अनुमान है। 29 सितंबर 2020 के एक हालिया पत्र में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने जल जीवन मिशन को एक जन आंदोलन बनाने के लिए लोगों और ग्राम पंचायतों से अपील की है।

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जल शक्ति मंत्रालय ने गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत पुरस्कार के वितरण के साथ स्वच्छ भारत दिवस 2020 मनाया

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आज गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत पुरस्कार के वितरण के साथ स्वच्छ भारत दिवस, 2020 मनाया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और जल शक्ति राज्य मंत्री श्री रतन लाल कटारिया ने आज स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के 6 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विभिन्न श्रेणियों और अभियानों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, जिलों, ब्लॉकों, ग्राम पंचायतों तथा अन्य को स्वच्छ भारत पुरस्कार (2020) प्रदान किए। पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन समारोह में ये पुरस्कार प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम में केंद्र, राज्य और जिला स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (एसबीएमजी) के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। शीर्ष पुरस्कार गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पंजाब और अन्य को प्रदान किए गए। गुजरात को राज्य श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया, तमिलनाडु के तिरुनेलवेली को सर्वश्रेष्ठ जिला, मध्य प्रदेश में उज्जैन के खाचरौद को सर्वश्रेष्ठ ब्लॉक और चिन्नौर (सलेम) को 1 नवंबर 2019 से 30 अप्रैल 2020 तक चलाये गए स्वच्छ सुंदर सामुदायिक शौचालय (एसएसएसएस) अभियान के तहत सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत के रूप में सम्मानित किया गया। 15 जून से 15 सितंबर 2020 तक आयोजित सामुदायिक शिक्षा अभियान (एसएसए) के लिए राज्य श्रेणी में शीर्ष पुरस्कार उत्तर प्रदेश (जीकेआरए) और गुजरात (गैर-जीकेआरए), जिला श्रेणी में प्रयागराज (जीकेआरए) और बरेली (गैर-जीकेआरए) तथा असम में बोरीगांव, बोंगईगांव को सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत का पुरस्कार मिला। 8 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए सप्ताह भर के गंदगी से मुक्त (जीएमबी) अभियान के लिए, तेलंगाना को अधिकतम श्रमदान भागीदारी के लिए शीर्ष पुरस्कार मिला, वहीं हरियाणा को अधिकतम ओडीएफ प्लस गांव घोषित करने के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पंजाब के मोगा जिला को दीवार पर चित्रों के माध्यम से अधिकतम आईईसी संदेशों को प्रसारित करने के लिए पहला पुरस्कार मिला। इसके अतिरिक्त कई श्रेणियों में विभिन्न पुरस्कार दिए गए। (पुरस्कार पाने वालों की पूरी सूची के लिए यहां क्लिक करें) केंद्रीय जल शक्ति श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण ने निर्धारित समय से पहले ही खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) होने की उपलब्धि हासिल की और इसे जन आंदोलन में परिवर्तित कर ग्रामीण भारत की रूप-रेखा बदल दी है। उन्होंने बताया कि इस असाधारण सफलता को आगे बढ़ाते हुए, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण को इस वर्ष के प्रारंभ में शुरू किया गया है, जो ओडीएफ स्थिरता तथा ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य गांवों में व्यापक स्वच्छता बनाये रखना है। श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने उल्लेख किया कि पिछले एक साल में आयोजित एसएसएसएस, एसएसए और जीएमबी जैसे बड़े अभियान सामुदायिक शौचालयों और एसएलडब्ल्यूएम के इस्तेमाल पर ज़ोर देते हैं और ये खुले में शौच मुक्त होने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के प्रयासों की सफलता का बखान भी करते हैं। श्री शेखावत ने कहा कि आज दिए जा रहे पुरस्कार जन आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए समुदाय के सदस्यों द्वारा किए गए योगदान की भरकस सरहाना करते हैं। इस अवसर पर, राज्य मंत्री श्री रतन लाल कटारिया ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसबीएम से जुड़े सभी हितधारकों के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक की यह एक उल्लेखनीय यात्रा है और दुनिया का सबसे बड़ा व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम है। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को अपने गांवों में स्वच्छता तथा इसके मानकों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए बधाई दी और सभी से स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में भी इसी भावना के साथ काम करना जारी रखने का आग्रह किया, जो कि ओडीएफ प्लस के बड़े लक्ष्य पर केंद्रित है। श्री कटारिया ने कहा कि इस अभियान के प्रति हम जो व्यापक जागरूकता और उत्साह देख रहे हैं, उससे ओडीएफ प्लस का लक्ष्य भी शीघ्रता से प्राप्त होगा। जल शक्ति मंत्रालय के सचिव डीडीडब्ल्यूएस श्री यू.पी. सिंह ने एसबीएमजी के पहले चरण में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए सभी राज्यों की एसबीएमजी टीमों की सराहना की और जोर दिया कि इसका दूसरा चरण स्थिरता तथा व्यापक स्वच्छता के हिसाब से अधिक महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का ज़िक्र हुए श्री सिंह ने कहा कि आज के दिन एक ऐसे महान इंसान का जन्म हुआ, जिसने न केवल हमें आज़ादी दिलाई बल्कि हमें अपने जीवन में स्वच्छता का महत्व भी सिखाया। इस अवसर पर स्वच्छ भारत दिवस 2020 पर एक लघु फिल्म की स्क्रीनिंग भी की गई जिसके बाद स्वच्छ भारत दिवस पुरस्कार वितरण हुआ। इसके अलावा सामुदायिक शौचालय अभियान (एसएसए) और स्वच्छ सुंदर सामुदायिक शौचालय (एसएसएसएस) अभियान पर एक ई-पुस्तिका भी लॉन्च की गई। ग्रामीण भारत में सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं की सार्वभौमिक पहुंच में सुधार के लिए पिछले एक वर्ष में इन अभियानों के तहत 50,000 से अधिक सामुदायिक शौचालय परिसरों (सीएससी) का निर्माण किया गया है। गंदगी मुक्त भारत (जीएमबी) चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता के तहत 24.4 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया। जीएमबी के तहत, 8.48 लाख आईईसी संदेश दीवारों और बिलबोर्ड पर चित्रित किए गए थे।

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गांधी जयंती के अवसर पर गांधी स्मृति पर आयोजित प्रार्थना सभा में प्रधानमंत्री सम्मिलित हुए

महात्मा गांधी के जन्म के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नई दिल्ली के गांधी स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए और राष्ट्रपिता को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

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भारतीय नौसेना (आईएन) और बंगलादेश नौसेना (बीएन) का द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘बोंगोसागर’ और समन्वित गश्ती (कॉर्पेट)

भारतीय नौसेना (आईएन) और बांग्लादेश नौसेना (बीएन) के द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'बोंगोसागर' का दूसरा संस्करण 03 अक्टूबर, 2020 को बंगाल की उत्तरी खाड़ी में शुरू हो रहा है। बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास का पहला संस्करण 2019 में आयोजित किया गया था, इसका उद्देश्य समुद्री अभ्यास और संचालन के एक व्यापक स्पेक्ट्रम के माध्यम से जंगी कार्रवाई का अंतर और संयुक्त परिचालन कौशल विकसित करना है। बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास के इस सत्र में दोनों नौसेनाओं के पोत इस दौरान सतह युद्ध अभ्यास, नाविक कला विकास और हेलीकॉप्टर संचालन का अभ्यास करेंगे। इसके अतिरिक्त 4 से 5 अक्टूबर 2020 तक बंगाल की उत्तरी खाड़ी में भारतीय नौसेना और बांग्लादेश नौसेना संयुक्त गश्ती (कॉर्पेट) के  तीसरे सत्र में भी हिस्सा लेगी, जिसमें दोनों नौसेना इकाइयां अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) के साथ संयुक्त रूप से गश्त करेंगी। संयुक्त गश्ती करने से दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ को बेहतर हुई है और गैरकानूनी गतिविधियों के संचालन को रोकने के उपायों को लागू करने में तत्परता दिखाई गई है।   भारतीय नौसेना की तरफ़ से स्वदेशी तौर पर निर्मित एंटी-सबमरीन वारफेयर कार्वेट पोत (आईएनएस) किल्टान और स्वदेश में ही निर्मित गाइडेड-मिसाइल कार्वेट आईएनएस खुखरी इसमें भाग ले रहे हैं। वहीं बांग्लादेश नौसेना का पोत (बीएनएस) अबू बक्र गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट और बीएनएस प्रेटॉय गाइडेड-मिसाइल कार्वेट अभ्यास में शामिल हो रहे हैं। इन पोतों के अलावा दोनों नौसेनाओं के मेरीटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट और इंटीग्रल हेलीकॉप्टर (एस) भी अभ्यास में हिस्सा लेंगे। भारत और बांग्लादेश के बीच गतिविधियों और अंतःक्रियाओं की एक विस्तृत श्रृंखला रही है, जिससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संबंध हैं और ये साल दर साल और मज़बूत होते रहे हैं। इसके अतिरिक्त भारत और बांग्लादेश की जनता घनिष्ठ सांस्कृतिक बंधन तथा लोकतांत्रिक समाज की साझा दृष्टि और नियमों पर आधारित आदेश भी साझा करती है। इस वर्ष बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास का यह संस्करण बहुत अधिक महत्व रखता है क्यूंकि यह बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की 100वीं जयंती मुजीब बारशो के मौके आयोजित हो रहा है। बोंगोसागर तथा भारतीय नौसेना और बांग्लादेश नौसेना संयुक्त गश्ती (कॉर्पेट) को तीन दिनों में शुरू किया जाएगा और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सागर (सुरक्षा और क्षेत्र में सभी के लिए विकास) के दृष्टिकोण के एक हिस्से के रूप में भारतीय नौसेना बांग्लादेशी नौसेना को प्राथमिकता देती है।

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मोटर वाहन ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए भारत और रूस के बीच पहला वेबिनार आयोजित

मोटर वाहन ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस के उपयोग पर भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा...

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भारतीय सेना पूर्व सैनिकों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुनिश्चित कराने के लिए प्रतिबद्ध

वर्तमान महामारी के प्रबंधन के दौरान हमारे चिकित्सा संसाधन बहुत दबाव में हैं। हालांकि भारतीय सेना पूर्व सैनिकों को गुणवत्तापूर्ण...

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भारतीय सेना को अपनी सेकुलर पहचान पर गर्व है

पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान द्वारा भारतीय सेना के खिलाफ और विशेष रूप से सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) में तैनात...

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प्रधानमंत्री ने लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर स्‍मरण किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर स्‍मरण किया है। प्रधानमंत्री ने कहा,...

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