“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
इस वक्त देश कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से तीसरी लहर का सामना कर रहा है। पिछले एक ...
Read moreDetailsवैक्सीन लगवाने के बाद लोगों में म्यूकोर्माइकोसिस (ब्लैक फंगस) के उत्पन्न होने की संभावना कम हो जाती है सामूहिक प्रतिरक्षा के साथ, तीसरी लहर की तीव्रता दूसरी लहर की तुलना में कम गंभीर होगी डेल्टा प्लस वेरिएंट चिंता का विषय बना हुआ है वैक्सीन के द्वारा बनाई जाने वाली एंटीबॉडीज़ कोविड-19 से संबंधित जटिलताओं, खून के जमने और द्वितीयक संक्रमणों से बचाती हैं रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए लोगों को हर वर्ष फ्लू जैसा बूस्टर टीका लेने की आवश्यकता होगी भारत, जुलाई, 2021: न्यूबर्ग डायग्नॉस्टिक्स के पैनल के सदस्यों की 'कोविड -19: लेसन्स लर्नट् एंड प्लानिंग फॉरवर्ड' पर परिचर्चा में यह विचार उभरकर सामने आया कि कोविड-19 का डेल्टा प्लस वेरिएंट चिंता का कारण बना हुआ है और त्वरित टीकाकरण करना हमारे पास उपलब्ध एकमात्र उपाय है। तत्काल टीकाकरण हमें ब्लैक फंगस, स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं, दुष्प्रभावों, खून के जमने और द्वितीयक संक्रमणों की संभावना को भी कम करते हुए सामूहिक रोग-प्रतिरोधक शक्ति प्राप्त करने में सक्षम करेगा। पैनल के सदस्यों ने यह चिंता भी व्यक्त की कि यदि हमारी मुस्तैदी में किसी प्रकार की कमी आती है, तो तीसरी लहर का आना तय है और वह संभवतः अगस्त में आरंभ होगी और नवंबर में अपने चरम पर होगी। प्रोफेसर एवं पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मोहन कामेश्वरन, ओटोरहिनोलैरिंजोलॉजिस्ट, संस्थापक, मद्रास ई.एन.टी. रिसर्च फाउंडेशन, चेन्नई ने कहा, “हमें मार्च में म्यूकोर्माइकोसिस (ब्लैक फंगस - गंभीर और दुर्लभ फंगल संक्रमण) का पहला मामला देखने को मिला था, 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की मृत्यु दर के साथ इसके मामले बढ़कर मार्च में 2 से 3 और मई में 10 से 15 हो गए। हालाँकि मामलों की संख्या अधिक है, पर यह उतनी भी अधिक नहीं है जितना कि अनुमान लगाया गया था। सबसे बड़ी समस्या है म्यूकोर्माइकोसिस के उपचार के लिए संबंधित दवाओं की कमी है। तमिलनाडु के क्षेत्र में, म्यूकोर्माइकोसिस का फ़ैलना महामारी के अंदर महामारी बन गया था।” उन्होंने बताया कि, "मेरे पास आने वाले ब्लैक फंगस के 60 से 70 प्रतिशत रोगियों ने वैक्सीन नहीं ली थी, 25-30 प्रतिशत रोगियों ने एक खुराक ली थी, और 5 प्रतिशत से कम रोगियों ने दोनों खुराकें ली हुई थी। इस प्रकार, जिन लोगों ने दोनों खुरालें ली हुई हैं, उनके लिए कोविड-19 संक्रमण से बचने की अच्छी संभावना होती है और उनमें ब्लैक फंगस का खतरा बहुत कम होता है।” तीसरी लहर के बारे में, डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल, वरिष्ठ निदेशक एवं एच.ओ.डी. - आंतरिक औषधि, बी.एल.के. मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली ने कहा, “हम अभी भी दूसरी लहर से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, परंतु तीसरी लहर के लिए तैयार हैं। टीकाकरण में वृद्धि होने के कारण तीसरी लहर के दूसरी लहर की तुलना में कम गंभीर होने की उम्मीद है। भारत के लगभग 21% लोगों ने पहली खुराक प्राप्त कर ली है, और 4% लोगों ने दोनों टीके की दोनों खुराकें लगवा ली हैं। हालाँकि, त्वरित टीकाकरण, कोविड-19 के लिए उचित व्यवहार और सुपर स्प्रेडर की घटनाओं
Read moreDetailsकोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया में इनसानों पर कहर बरसा दिया है। मौजूदा परिस्थिति में रक्षा की पहली पंक्ति में ...
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Read moreDetailsदेशभर में पिछले कुछ दिनों में कोरोना वायरस (Coronavirus) ने नए मामलों में कमी आई है, लेकिन मौत के आंकड़े ...
Read moreDetailsप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘टीका उत्सव’ वैक्सीनेशन पर्व को कोरोना के विरुद्ध दूसरी बड़ी लड़ाई कहा है और व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ सामाजिक स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया है। यह उत्सव आज महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर शुरू हुआ है और 14 अप्रैल को बाबा साहेब अम्बेडकर की जयंती तक चलेगा। इस अवसर पर एक संदेश में प्रधानमंत्री ने इस अभियान के सम्बन्ध में चार बिन्दुओं पर बल दिया। पहला, हर एक-टीका लगवाए, अर्थात ऐसे व्यक्ति जो स्वयं को टीका लगवाने के लिए नहीं जा सकते, जैसे कि अनपढ़ एवं वृद्ध जन, उनकी सहायता करें। दूसरा, हर एक- दूसरे का उपचार करे। ऐसा उन लोगों को कोरोना का उपचार दिलवाने के लिए है जिनके पास इसकी जानकारी नहीं है और इसके लिए आवश्यक संसाधन नहीं है। तीसरा, हर एक – दूसरे को बचाए, अर्थात मै मास्क पहनूंगा और अपने अलावा औरों को बचाऊंगा। इस पर जोर दिया जाना चाहिए। और अंत में ‘सूक्ष्म संगरोध क्षेत्र’ (माइक्रो कन्टेनमेंट जोन्स) बनाने के लिए समाज और जनता को पहल करनी होगी। यदि कोरोना संक्रमण का एक भी प्रमाणित मामला सामने आता है तो परिवार के सदस्यों और समाज के लोगों को ‘माइक्रो कन्टेनमेंट जोन्स’ बनाने होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसी घनी जनसंख्या वाले देश में ‘माइक्रो कन्टेनमेंट जोन्स’ कोरोना के विरुद्ध लड़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने परीक्षण करने और जागरूकता बढाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हर पात्र व्यक्ति से टीका लगवाने के लिए कहा।उन्होंने कहा कि ऐसा करना समाज और प्रशासन दोनों का पहला प्रयास होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हमें वैक्सीन की शून्य बर्बादी (जीरो वैक्सीन वेस्टेज) की दिशा में बढना होगा।उन्होंने कहा कि टीकाकरण क्षमता का सर्वोत्तम उपयोग ही हमारी क्षमता बढाने का रास्ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘माइक्रो कन्टेनमेंट जोन्स’ के बारे में जागरूक होने से ही हमारी सफलता का निर्धारण होगा। इसके लिए हमे अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलना, सभी पात्र व्यक्तियों का टीकाकरण और मास्क पहनने एवं अन्य निर्देशों का पालन करने जैसे कोविड उचित व्यवहार का हम सब कैसे पालन करते हैं, का तरीका अपनाना होगा। प्रधानमंत्री ने इन चार दिनों के ‘टीका उत्सव’ के दौरान व्यक्तिगत, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर लक्ष्य निर्धारित करनेऔर उनकी पूर्ति के लिए गम्भीर प्रयास के लिए कहा। उन्होंने आशा व्यक्त की जन भागीदारी, जागरूकता और दायित्वपूर्ण व्यवहार के साथ हम सभी एक बार फिर से कोरोना पर नियन्त्रण करने में सफल हो सकेंगे। उन्होंने दवाई भी-कड़ाई भी की याद दिलाने के साथ ही अपनी बात पूरी की।
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Read moreDetailsकेंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने इस बात पर चिंता जताई है कि जम्मू में कोविड के बाद स्वस्थ होने ...
Read moreDetailsकेन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की जानकारी में आया है कि कुछ राज्य विभिन्न अधिनियमों के तहत प्रावधानों का प्रयोग करके ऑक्सीजन ...
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