- वैक्सीन लगवाने के बाद लोगों में म्यूकोर्माइकोसिस (ब्लैक फंगस) के उत्पन्न होने की संभावना कम हो जाती है
- सामूहिक प्रतिरक्षा के साथ, तीसरी लहर की तीव्रता दूसरी लहर की तुलना में कम गंभीर होगी
- डेल्टा प्लस वेरिएंट चिंता का विषय बना हुआ है
- वैक्सीन के द्वारा बनाई जाने वाली एंटीबॉडीज़ कोविड-19 से संबंधित जटिलताओं, खून के जमने और द्वितीयक संक्रमणों से बचाती हैं
- रोग–प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए लोगों को हर वर्ष फ्लू जैसा बूस्टर टीका लेने की आवश्यकता होगी
भारत, जुलाई, 2021: न्यूबर्ग डायग्नॉस्टिक्स के पैनल के सदस्यों की ‘कोविड -19: लेसन्स लर्नट् एंड प्लानिंग फॉरवर्ड‘ पर परिचर्चा में यह विचार उभरकर सामने आया कि कोविड-19 का डेल्टा प्लस वेरिएंट चिंता का कारण बना हुआ है और त्वरित टीकाकरण करना हमारे पास उपलब्ध एकमात्र उपाय है। तत्काल टीकाकरण हमें ब्लैक फंगस, स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं, दुष्प्रभावों, खून के जमने और द्वितीयक संक्रमणों की संभावना को भी कम करते हुए सामूहिक रोग-प्रतिरोधक शक्ति प्राप्त करने में सक्षम करेगा। पैनल के सदस्यों ने यह चिंता भी व्यक्त की कि यदि हमारी मुस्तैदी में किसी प्रकार की कमी आती है, तो तीसरी लहर का आना तय है और वह संभवतः अगस्त में आरंभ होगी और नवंबर में अपने चरम पर होगी।
प्रोफेसर एवं पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मोहन कामेश्वरन, ओटोरहिनोलैरिंजोलॉजिस्ट, संस्थापक, मद्रास ई.एन.टी. रिसर्च फाउंडेशन, चेन्नई ने कहा, “हमें मार्च में म्यूकोर्माइकोसिस (ब्लैक फंगस – गंभीर और दुर्लभ फंगल संक्रमण) का पहला मामला देखने को मिला था, 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की मृत्यु दर के साथ इसके मामले बढ़कर मार्च में 2 से 3 और मई में 10 से 15 हो गए। हालाँकि मामलों की संख्या अधिक है, पर यह उतनी भी अधिक नहीं है जितना कि अनुमान लगाया गया था। सबसे बड़ी समस्या है म्यूकोर्माइकोसिस के उपचार के लिए संबंधित दवाओं की कमी है। तमिलनाडु के क्षेत्र में, म्यूकोर्माइकोसिस का फ़ैलना महामारी के अंदर महामारी बन गया था।”
उन्होंने बताया कि, “मेरे पास आने वाले ब्लैक फंगस के 60 से 70 प्रतिशत रोगियों ने वैक्सीन नहीं ली थी, 25-30 प्रतिशत रोगियों ने एक खुराक ली थी, और 5 प्रतिशत से कम रोगियों ने दोनों खुराकें ली हुई थी। इस प्रकार, जिन लोगों ने दोनों खुरालें ली हुई हैं, उनके लिए कोविड-19 संक्रमण से बचने की अच्छी संभावना होती है और उनमें ब्लैक फंगस का खतरा बहुत कम होता है।”
तीसरी लहर के बारे में, डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल, वरिष्ठ निदेशक एवं एच.ओ.डी. – आंतरिक औषधि, बी.एल.के. मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली ने कहा, “हम अभी भी दूसरी लहर से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, परंतु तीसरी लहर के लिए तैयार हैं। टीकाकरण में वृद्धि होने के कारण तीसरी लहर के दूसरी लहर की तुलना में कम गंभीर होने की उम्मीद है। भारत के लगभग 21% लोगों ने पहली खुराक प्राप्त कर ली है, और 4% लोगों ने दोनों टीके की दोनों खुराकें लगवा ली हैं। हालाँकि, त्वरित टीकाकरण, कोविड–19 के लिए उचित व्यवहार और सुपर स्प्रेडर की घटनाओं





















