Tag: science

आकाशवाणी, लखनऊ द्वारा ‘सतत विकास के लिए विज्ञान’ विषयक ‘जी-20’ यूथ कॉन्क्लेव एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शानदार आयोजन

आकाशवाणी, लखनऊ द्वारा 03 अगस्त 2023 को एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ में ‘सतत विकास के लिए विज्ञान’ विषय पर ‘जी-20’ यूथ ...

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भारत के युवा वैज्ञानिकों को सशक्त बनाने पर दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार-मंथन सत्र

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय, आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी और आईएनवाईएएस ने संयुक्त रूप से 24 और 25 ...

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भारतीय मानक ब्यूरो ने 2021-22 में देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में 1037 मानक क्लब स्थापित किए

राष्ट्रीय मानक निकाय - भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को भारत सरकार द्वारा मानकीकरण और प्रमाणन की इसकी मुख्य गतिविधियों के ...

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मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने साइंस सिटी, अहमदाबाद से राज्यव्यापी ‘गुजरात ज्ञान गुरु प्रश्नोत्तरी’ का शुभारंभ किया

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने कहा है कि गुजरात ज्ञानगुरु क्विज हमारी आने वाली पीढ़ी को ज्ञानी, सूचनात्मक और ज्ञानवान ...

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SVNIT के छात्रों ने बनाया एक्सोस्केलेटन, पैराप्लेजिक मरीजों को रोजाना जिंदगी में होगी आसानी

अब पैराप्लेजिक के मरीज आसानी से चल-फिर सकेंगे और रोजाना की दिनचर्या में भाग ले सकेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि ...

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हिमालयन चन्‍द्र टेलीस्कोप के 20 वर्ष पूरे होने पर उसके द्वारा प्रस्‍तुत विज्ञान पर प्रकाश डालने के लिए कार्यशाला

लद्दाख के ठंडे, शुष्क रेगिस्तान में, समुद्र तल से 4500 मीटर ऊपर, दो दशकों से, भारतीय खगोलीय वेधशाला (आईएओ) में 2 मीटर चौड़ाई वाला ऑप्टिकल ...

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महाराष्ट्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यशील शोध संस्‍थान

महाराष्ट्र राज्‍य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत अनुसंधान संस्थानों और जिन विषयों पर अनुसंधान किया जा रहा है, वे ...

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भारतीय विज्ञान कांग्रेस की उपलब्धियां

वार्षिक भारतीय विज्ञान कांग्रेस का आयोजन वर्ष 1914 से प्रत्‍येक वर्ष किया जाता है। इस वर्ष, 107वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस ...

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा विदेशों में रहने वाले भारतीय शोधकर्त्ताओं को रोजगार के बेहतर विकल्पव और अवसर प्रदान करने हेतु आकर्षक विकल्‍प और अवसर प्रदान करने वाली योजनाएं

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विदेशों में रह रहे भारतीय अनुसंधानकर्ताओं को भारतीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों में काम करने के ...

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कोविड-19 ने वैज्ञानिकों को जीवित बचे रहने के लिए बहुत तेज़ी से नई – नई खोज करने के लिए मजबूर किया है

सुश्री दिगंतिका बोस, बर्दवान स्थित मेमारी में वी एम इंस्टीट्यूशन यूनिट II में बारहवीं कक्षा में पढ़ती हैं। लेकिन वह अपनी शुरुआती जीवन से ही थॉमस अल्वा एडिसन के उस सिद्धांत से बहुत प्रभावित हैं। जिसमें उन्होंने कहा था कि आविष्कार करने के लिए, आपको एक अच्छी कल्पना और ढेर सारे कबाड़ की जरूरत है। इस कहावत के अनुसार कि, आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है, दिगंतिका ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आम लोगों की बड़ी परेशानी महसूस की। उसके बाद दिगंतिका ने हवा प्रदान करने और वायरस को नष्ट करने वाला मास्क प्रस्तुत किया, जिसे भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अत्यधिक सराहा है। इसी तरह से आईआईटी खड़गपुर ने शैक्षिक संस्थानों के लिए ई-कक्षा कम बैंडविड्थ सॉफ्टवेयर दीकशक तैयार किया है। इसके माध्यम से कोई भी शिक्षक उस चैट बॉक्स पर प्रश्नों को लाइव देखने में सक्षम होता है, जहां प्रत्येक छात्र अपने प्रश्नों को भेज सकता है। वहां कोई भी शिक्षक अपनी शिक्षण सामग्री के साथ-साथ स्क्रीन पर भी ध्यान केंद्रित कर सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं छात्रों के पास एक डाउट बॉक्स का भी एक्सेस होता है, जहां वे "अपने हाथों को ऊपर उठाने" के लिए क्लिक कर सकते हैं और शिक्षक से बात करने के लिए प्रतीक्षा कर सकते हैं, जैसा कि किसी भी वास्तविक कक्षा में किया जा सकता है। शिक्षक इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से छात्रों के साथ कोई भी दस्तावेज़ साझा कर सकते हैं और वे उसी समय नोट्स भी अपडेट कर सकते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत योजना के एक भाग के रूप में पत्र सूचना कार्यालय और क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो चुचुरा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक वेबिनार में इससे सम्बंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें भाग लेने वालों में आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर वी के तिवारी, सीएसआईआर-सीएमईआरआई दुर्गापुर के निदेशक प्रोफेसर डॉ. हरीश हिरानी, ​​बिड़ला औद्योगिक और प्रौद्योगिकी संग्रहालय के निदेशक श्री वी.एस. रामचंद्रन, और जेआईएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग कल्याणी के ईसीई विभाग प्रमुख एसोसिएट प्रोफेसर डॉ बिस्वरूप नेगी शामिल थे। इन सबके अलावा सुश्री दिगंतिका बोस ने भी इसमें हिस्सा लिया। इस मौके पर प्रोफेसर तिवारी ने देश के सीमांत लोगों के लिए सस्ती कीमत पर कोविड-19 संक्रमण का पता लगाने के लिए अपने संस्थान में बनाये गए पोर्टेबल रैपिड डायग्नोस्टिक डिवाइस के आविष्कार की जानकारी दी। वहीँ प्रोफेसर डॉ. हिरानी के अनुसार, सीएसआईआर-सीएमईआरआई दुर्गापुर न केवल कम लागत वाले बल्कि उच्च दक्षता वाले तीन-स्तरीय फेसमास्क बनाए हैं। इसके अतिरिक्त सड़क को साफ़ करने वाले ट्रैक्टर, मैकेनिकल वेंटिलेटर, साबुन, सैनिटाइजर और डिस्पेंसर, अस्पताल सहायक रोबोट, सौर-आधारित इंटेलीमैस्ट, 360 डिग्री कार फ्लशर और ड्राई फॉगिंग जूता कीटाणुनाशक भी विकसित किए गए हैं। इन सब के बाद मानवीय मैला धोने की प्रथा से बचने तथा उच्च मानकों को बनाए रखते हुए अपशिष्ट जल के निस्तारण में मदद के लिए यंत्रीकृत सीवेज सफाई प्रणाली विकसित की गई है। श्री रामचंद्रन ने ऑनलाइन टिकटिंग और एंट्री सिस्टम, अल्कोहल-फ्री और आयुर्वेदिक प्रवेश मार्ग, प्रदर्शनी के स्पर्श रहित कार्यान्वयन, यूवी आधारित उत्पाद प्रक्षालक, वर्चुअल दौरे और कक्षाएं, भीड़ नियंत्रण के लिए छवि प्रसंस्करण तथा मानव गति-आधारित से संबंधित अपने तकनीकी हस्तक्षेप और सैनिटाइजर डिस्पेंसर प्रस्तुत किए। वहीँ सुश्री बोस ने वायरस नष्ट करने वाले फेस मास्क के अलावा, मुखौटे और लोगों के उपयोग के लिए होममेड पारदर्शी फेस शील्ड, पुलिस के लिए दूरी निर्धारित करने का यन्त्र और कान के दबाव में कमी के उपकरण जैसे उनके नवाचारों को प्रदर्शित किया। डॉ. नेगी ने अपनी टीम द्वारा विकसित अल्कोहल से नष्ट होने वाले कोरोना वायरस दस्तानों का प्रदर्शन किया। साथ ही उन्होंने मुद्रा और सिक्के के कीटाणुनाशक के अलावा रेनकोट को पीपीई किट में परिवर्तित करने  की कार्यविधि और मास्क का निस्तारण करने के बारे में प्रस्तुति दी। अतिरिक्त महानिदेशक सूचना और प्रसारण मंत्रालय, सुश्री जेन नामचू भी इस वेबिनार में मौजूद थीं। वेबिनार का संचालन पत्र सूचना कार्यालय, कोलकाता की मीडिया और संचार अधिकारी श्रीमती श्रीजाता साहा साहू और फील्ड आउटरीच ब्यूरो, चुचुरा के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्री संदीपन दास गुप्ता द्वारा किया गया था।

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