“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
रोटरी क्लब ऑफ कांकरिया अहमदाबाद ने यू फर्स्ट फाउंडेशन के साथ मिलकर रोटरी कम्युनिटी के बुजुर्गों के लिए केयर और ...
Read moreDetailsदेश में एक दिसंबर से कई बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ेगा ...
Read moreDetailsकेंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्याय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने आज "छठ पूजा पर मेरा ...
Read moreDetailsकेंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज गुजरात के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री ...
Read moreDetailsभारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने आज राजस्थान के 14 द्वितीयक श्रेणी के शहरों में समावेशी एवं सतत ...
Read moreDetailsकेंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, इनके बचपन को बचाना तथा इनके विकास के लिए उचित कदम उठाकर इन्हें सशक्त बनाना हमारी जिम्मेदारी है। आज हम देश के बच्चों के लिए सजगता से कार्य करते हुए अपने देश के लिए कल के आत्मनिर्भर युवाओं का निर्माण करने में सक्षम हो पायेंगे। श्री गंगवार ने गुरुवार ...
Read moreDetailsयह सुश्री कुलविंदर कौर बरार के लिए एक बड़ी व्यस्त सुबह है। यहां तक कि जैसे-तैसे वह जल्दी से अपने घर के कामों को निपटाती हैं, लेकिन उनका ध्यान आगे दिन भर की बैठकों पर भी होता है। उनका सारा दिन हितधारकों, सरकारी अधिकारियों, कॉरपोरेट्स, एनआरआई और सबसे महत्वपूर्ण अपनी टीम के साथ मिलने-जुलने और चर्चा करने में व्यस्त रहेगा। कुलविंदर का जीवन किसी भी अन्य अधिकारी की तरह ही है, लेकिन एक अपवाद के तौर पर। वह पंजाब के बठिंडा जिले के मेम्हा भगवाना गाँव की सरपंच हैं, जिन्होंने आज के दौर की कार्यशैली को अपने जीवन में अच्छे से आत्मसात किया है। बचपन से ही कुलविंदर ने गाँव की महिलाओं को गाँव में पीने योग्य पानी की कमी के कारण परेशान होते देखा है। कुलविंदर इस स्थिति को बदलने के लिए संकल्पबद्ध थीं और गाँव का सरपंच बनने के तुरंत बाद उन्होंने एक सकारात्मक दृष्टिकोण से इस समस्या की ओर काम करना शुरू कर दिया। इस मामले में उनका विचार और इरादा बहुत शानदार था, लेकिन उन्हें इसकी शुरुआत करने के लिए भारी धन की आवश्यकता थी। हालांकि जल जीवन मिशन की शुरुआत होने के साथ ही यहां चीजें बहुत अधिक सुव्यवस्थित हो गईं और जल्द ही मेम्हा गांव के प्रत्येक घर में पानी उपलब्ध कराने के लिए नलके से जल योजना को मंजूरी दी गई। मिशन को और आगे ले जाने के लिए ग्राम जल और स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) के सदस्य घर-घर जाकर यह समझाते हैं कि कैसे पाइप द्वारा की गई जलापूर्ति से न केवल समय और ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि निर्धारित गुणवत्ता का स्वच्छ पेयजल भी उपलब्ध होगा। योजना के ब्योरे से उन स्थानों पर ज़रूर अवगत कराया गया, जहां गाँव के बुनियादी ढाँचे के लिए 10% पूंजीगत व्यय का योगदान करने की आवश्यकता है। सभी परिवारों को योगदान करने और एक नल कनेक्शन प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि उन्हें कृषि कार्यों के लिए दिन के दौरान अधिक समय मिले। अधिकांश लोग पानी के कनेक्शन प्राप्त करने के लिए पैसे का भुगतान करने के लिए सहमत हुए क्योंकि पानी की उपलब्धता एक गंभीर चिंता थी। लेकिन गाँव में कुछ घर ऐसे भी थे जो योगदान नहीं दे सकते थे। ग्राम पंचायत ने उनके शुल्क को माफ करने का निर्णय लिया। उनके घरों में नल कनेक्शन का खर्च पंचायत द्वारा वहन किया गया था। आज किसी भी नए पानी के नल कनेक्शन के लिए वीडब्ल्यूएससी शुल्क सामान्य घर से 500 रुपये और अनुसूचित जाति वाले घरों से 250 रुपये लिया जाता है। अगला लक्ष्य पंचायत की बैठकों में नियमित रूप से पानी का मुद्दा उठाना था। इस विचार को लागू करने में पितृसत्ता मुख्य बाधा थी। हालांकि कुलविंदर सरपंच के रूप में ग्राम पंचायत का नेतृत्व करती हैं, लेकिन बहुत कम महिलाएं थीं जो वास्तव में ग्राम सभा की बैठक में शामिल होती थीं। महिलाओं को संगठित करना एक कठिन कार्य था। आज लगभग 80% महिलाएं ग्राम सभा में हिस्सा लेती हैं और अपनी चिंताओं को साझा करती हैं। एक महिला को इस तरह के ज्वलंत मामलों के निपटारे के लिए शीर्ष पर काम करता देखकर उन महिलाओं में भी आत्मविश्वास पैदा होता है, जो अधिक सहभागी हैं और नेतृत्व की भूमिका निभाने को तैयार हैं। जल जीवन मिशन का आईईसी अभियान समुदाय को संचालित करने में एक बड़ी मदद थी। महिलाओं की भूमिका और जल प्रबंधन में उनका महत्वपूर्ण योगदान इस अभियान का हिस्सा था। नियमित रूप से जागरूकता लाने के लिए गाँव में एक महिला ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन किया गया था क्योंकि गाँव की महिलाएँ मानती हैं कि वे घर चलाने वाली महिलाएँ हैं, इसलिए वे ही पानी का बेहतर प्रबंधन कर सकती हैं। जल जीवन मिशन को धन्यवाद! गाँवों में एक मौन क्रांति हो रही है। पाइप के पानी के कनेक्शन ने महिलाओं के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्हें पानी ढूंढ कर और ढोकर लाने के दंश से बचाया गया है। घर पर पानी का एक नल होने से, महिलाओं को अब अधिक समय मिलता है। एक अन्य प्रमुख बदलाव यह सामने आया है कि गांव में पाइप से पानी का कनेक्शन पहुंचने के बाद से पढाई छोड़ने की दर कम हो गई है। कई किशोरों ने स्कूलों में फिर से दाखिला लिया है। पंचायत में एक पाँच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है जो समय-समय पर गाँव में आपूर्ति किये जाने वाले पानी की शुद्धता और मानक का आकलन करने के लिए जल स्रोत तथा घरेलू नल कनेक्शन का परीक्षण करती है। पेयजल आपूर्ति से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए गांव में कुशल राजमिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर उपलब्ध हैं, वहीं अब महिलाओं को भी मामूली मरम्मत कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि मौजूदा बुनियादी ढांचे को बनाए रखा जा सके। आज मेम्हा भगवाना गाँव सामुदायिक भागीदारी और जेजेएम योजना से लाभान्वित होने का एक आदर्श उदाहरण है, जहाँ गाँव में 100 प्रतिशत कार्यात्मक घरेलू पानी का कनेक्शन है और इसे 1,484 लोगों की आबादी के लिए सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है, जिसका अनुकरण अन्य गाँव कर सकते हैं। हालांकि कुलविंदर कौर के लिए, यह यात्रा अभी शुरू हुई है, क्योंकि वह अब गांव में ग्रे वाटर मैनेजमेंट और सोलर लाइट लगाने की दिशा में काम करने की योजना बना रही है। उनके नेतृत्व में गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र देखने की अन्य योजनाएँ हैं। वह स्वयं सहायता समूह की छत्रछाया में गांव की महिलाओं को जुटाने की कोशिश में हैं। वह कहती हैं, 'मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि गांव की ये महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के लिए कुछ लाभकारी आर्थिक गतिविधियां करें और परिवार की भलाई में अपना योगदान दें।' सरकार का प्रमुख कार्यक्रम, जल जीवन मिशन 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में पीने का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्यों के साथ साझेदारी में चल रहा है। पिछले एक साल में, देश के 2.30 से अधिक करोड़ घरों में नल से जल कनेक्शन पहले से ही उपलब्ध कराया जा चुका है। अब तक 5.50 करोड़ परिवारों यानी कि लगभग 30% कुल ग्रामीण परिवारों को अब अपने घरों में सुरक्षित नल का पानी मिलने का अनुमान है। 29 सितंबर 2020 के एक हालिया पत्र में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल जीवन मिशन को एक जन आंदोलन बनाने के लिए लोगों और ग्राम पंचायतों से अपील की है।
Read moreDetailsजल शक्ति मंत्रालय द्वारा आज गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत पुरस्कार के वितरण के साथ स्वच्छ भारत दिवस, 2020 मनाया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और जल शक्ति राज्य मंत्री श्री रतन लाल कटारिया ने आज स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के 6 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विभिन्न श्रेणियों और अभियानों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, जिलों, ब्लॉकों, ग्राम पंचायतों तथा अन्य को स्वच्छ भारत पुरस्कार (2020) प्रदान किए। पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन समारोह में ये पुरस्कार प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम में केंद्र, राज्य और जिला स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (एसबीएमजी) के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। शीर्ष पुरस्कार गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पंजाब और अन्य को प्रदान किए गए। गुजरात को राज्य श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया, तमिलनाडु के तिरुनेलवेली को सर्वश्रेष्ठ जिला, मध्य प्रदेश में उज्जैन के खाचरौद को सर्वश्रेष्ठ ब्लॉक और चिन्नौर (सलेम) को 1 नवंबर 2019 से 30 अप्रैल 2020 तक चलाये गए स्वच्छ सुंदर सामुदायिक शौचालय (एसएसएसएस) अभियान के तहत सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत के रूप में सम्मानित किया गया। 15 जून से 15 सितंबर 2020 तक आयोजित सामुदायिक शिक्षा अभियान (एसएसए) के लिए राज्य श्रेणी में शीर्ष पुरस्कार उत्तर प्रदेश (जीकेआरए) और गुजरात (गैर-जीकेआरए), जिला श्रेणी में प्रयागराज (जीकेआरए) और बरेली (गैर-जीकेआरए) तथा असम में बोरीगांव, बोंगईगांव को सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत का पुरस्कार मिला। 8 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए सप्ताह भर के गंदगी से मुक्त (जीएमबी) अभियान के लिए, तेलंगाना को अधिकतम श्रमदान भागीदारी के लिए शीर्ष पुरस्कार मिला, वहीं हरियाणा को अधिकतम ओडीएफ प्लस गांव घोषित करने के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पंजाब के मोगा जिला को दीवार पर चित्रों के माध्यम से अधिकतम आईईसी संदेशों को प्रसारित करने के लिए पहला पुरस्कार मिला। इसके अतिरिक्त कई श्रेणियों में विभिन्न पुरस्कार दिए गए। (पुरस्कार पाने वालों की पूरी सूची के लिए यहां क्लिक करें) केंद्रीय जल शक्ति श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण ने निर्धारित समय से पहले ही खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) होने की उपलब्धि हासिल की और इसे जन आंदोलन में परिवर्तित कर ग्रामीण भारत की रूप-रेखा बदल दी है। उन्होंने बताया कि इस असाधारण सफलता को आगे बढ़ाते हुए, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण को इस वर्ष के प्रारंभ में शुरू किया गया है, जो ओडीएफ स्थिरता तथा ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य गांवों में व्यापक स्वच्छता बनाये रखना है। श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने उल्लेख किया कि पिछले एक साल में आयोजित एसएसएसएस, एसएसए और जीएमबी जैसे बड़े अभियान सामुदायिक शौचालयों और एसएलडब्ल्यूएम के इस्तेमाल पर ज़ोर देते हैं और ये खुले में शौच मुक्त होने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के प्रयासों की सफलता का बखान भी करते हैं। श्री शेखावत ने कहा कि आज दिए जा रहे पुरस्कार जन आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए समुदाय के सदस्यों द्वारा किए गए योगदान की भरकस सरहाना करते हैं। इस अवसर पर, राज्य मंत्री श्री रतन लाल कटारिया ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसबीएम से जुड़े सभी हितधारकों के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक की यह एक उल्लेखनीय यात्रा है और दुनिया का सबसे बड़ा व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम है। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को अपने गांवों में स्वच्छता तथा इसके मानकों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए बधाई दी और सभी से स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में भी इसी भावना के साथ काम करना जारी रखने का आग्रह किया, जो कि ओडीएफ प्लस के बड़े लक्ष्य पर केंद्रित है। श्री कटारिया ने कहा कि इस अभियान के प्रति हम जो व्यापक जागरूकता और उत्साह देख रहे हैं, उससे ओडीएफ प्लस का लक्ष्य भी शीघ्रता से प्राप्त होगा। जल शक्ति मंत्रालय के सचिव डीडीडब्ल्यूएस श्री यू.पी. सिंह ने एसबीएमजी के पहले चरण में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए सभी राज्यों की एसबीएमजी टीमों की सराहना की और जोर दिया कि इसका दूसरा चरण स्थिरता तथा व्यापक स्वच्छता के हिसाब से अधिक महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का ज़िक्र हुए श्री सिंह ने कहा कि आज के दिन एक ऐसे महान इंसान का जन्म हुआ, जिसने न केवल हमें आज़ादी दिलाई बल्कि हमें अपने जीवन में स्वच्छता का महत्व भी सिखाया। इस अवसर पर स्वच्छ भारत दिवस 2020 पर एक लघु फिल्म की स्क्रीनिंग भी की गई जिसके बाद स्वच्छ भारत दिवस पुरस्कार वितरण हुआ। इसके अलावा सामुदायिक शौचालय अभियान (एसएसए) और स्वच्छ सुंदर सामुदायिक शौचालय (एसएसएसएस) अभियान पर एक ई-पुस्तिका भी लॉन्च की गई। ग्रामीण भारत में सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं की सार्वभौमिक पहुंच में सुधार के लिए पिछले एक वर्ष में इन अभियानों के तहत 50,000 से अधिक सामुदायिक शौचालय परिसरों (सीएससी) का निर्माण किया गया है। गंदगी मुक्त भारत (जीएमबी) चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता के तहत 24.4 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया। जीएमबी के तहत, 8.48 लाख आईईसी संदेश दीवारों और बिलबोर्ड पर चित्रित किए गए थे।
Read moreDetails© 2025 Gujarat Patrika - Developement and Design Right reserved by Gujarat Patrika.
© 2025 Gujarat Patrika - Developement and Design Right reserved by Gujarat Patrika.