“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
सास ने अपनी बहू को डाँटते हुए कहा "कलमूही गर दूसरी बार भी लड़की हुई तो तुझे मैं हमारे घर...
Read moreDetailsयाद है सर्दियों की सुबहजब धुँध से आँख मिलाकरतुमसे मिलने आया करता था मैंऔर तुम उनींदी आँखों से मेट्रो की...
Read moreDetailsसंस्कृति मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लापता कलाकृतियों के संबंध में मीडिया में आ...
Read moreDetailsबारिश का मौसम चल रहा था, में और मेरे पापा दोनो बारिश के बारे मे गहरी चर्चा कर रहे थे...
Read moreDetailsवो कहते है की हमें दर्देगम मुफ्त में मिलते है। उन्हें क्या मालूम कितने संबंध शूली पे चढ़ते है।। हम...
Read moreDetailsवो कल भी भूखा सोया था फुटपाथ में अचानक खूब पटाखे चले रात में झूमते चिल्लाते नाचते लोगों को देखा...
Read moreDetailsतुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं गाहे-गाहे इसे पढ़ा कीजे दिल से बेहतर कोई किताब...
Read moreDetailsमुझे बारिश अच्छी लगतीं हैं पिताजी को भी अच्छी लगती थी। हम दोनों कविता लिखतें है । किन्तु बारिशके आनेसे...
Read moreDetailsसाहित्य के क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों को चलाने वाले समूह हार्ट ऑफ लिटरेचर द्वारा हाल ही में एक राज्य स्तरीय...
Read moreDetailsज़िंदा लाश सी एक लड़की चुपचाप कोने में सोई है, खोये हुए ज़मीर से अपनी माँ के सामने देख रोई...
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