“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
रैनी गाँव के पास ग्लेशियर को तोड़ने के लिए सबसे पहले ऋषिगंगा नदी थी, जिसमें पानी भर गया था। ऋषिगंगा...
Read moreDetailsसज्जनों का मिलना बहुत मुश्किल है। आप एक बार के लिए सोच रहे होंगे कि क्या हर जगह सज्जन मिल...
Read moreDetailsइस दिल की बातें सब खोल दूँ, राज़दार ऐसा हो कोई.. बेपरवाह हो सब बोल दूँ, कि साथी ऐसा हो...
Read moreDetailsकोरोना वायरस संकट ने आम आदमी की आय में भारी गिरावट दर्ज की है जबकि अमीरों की संपत्ति में वृद्धि...
Read moreDetailsजब जब डूबा हूँ मैं चाँद की तरह, वो ख़ुद डूब,सूरज सा मुझे उगा देते है । कुछ दोस्त आसमाँ...
Read moreDetailsकठिनाइयों को दूर कैसे करते है ये अब कई स्थानों से सीखा जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुश्किलें...
Read moreDetailsइक दफा दिन में रात हुई थी, ख्वाहिशें सारी खाक हुई थी। तब जा कर कुछ चैन पाया था, कोशिशें...
Read moreDetailsमुद्दतों से कोई पैग़ाम नहीं आता है जज़्बा-ए-दिल भी मेरे काम नहीं आता है है अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल के दम-ए-ज़िक्र-ए-वफ़ा याद उन...
Read moreDetailsलब पे काँटों के है फ़रियाद-ओ-बुका मेरे बाद कोई आया ही नहीं आबला-पा मेरे बाद मेरे दम तक ही रहा...
Read moreDetailsमर रहा हूँ कि मिल के दुआ कीजिए। मैं बशर हूँ मुझे ना ख़ुदा कीजिए। दर्द-ए-जख़्म तो सह ही लूंगा...
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