“रामचरितमानस” – एक चौपाई
April 8, 2020
थोल पक्षी अभयारण्य
November 5, 2020
गर्व क्यों न हो मुझे? आखिर मेरे देश के सर का ताज हैं हिंदी। भाषाओं की परिभाषा, सैनिको की शान...
Read moreDetailsतेरे दूर जाने का ज़हर पी गया था, हैरत में हूँ कि मैं फिर जी गया था! उन्हीं गलियों में...
Read moreDetailsहिंदी दिवस के अवसर पर मैं इसके सशक्तिकरण में योगदान देने वाले सभी महानुभावों को नमन करता हूं और देशवासियों...
Read moreDetailsआंकड़ों की जीवित किंवदंती और पद्म विभूषण प्रोफेसर काल्यमपुदी राधाकृष्ण राव को उनके 100वें जन्मदिन के अवसर पर 9 सितंबर, 2020 को आयोजित एक...
Read moreDetailsआंसुओ की बारिश निकली थी, खुद ही की साजिश निकली थी। यु जनाजा निकला था उनका, कि कफ़न में ख्वाइश...
Read moreDetailsप्यास दिला कर प्यासा छोड़ दिया, फिर झूठा सा बहाना छोड़ दिया! आप ने हम से रिश्ता तोड़ दिया, हम...
Read moreDetailsए कुदरत ! तेरा आज़माना नहीं देखा, इक ज़माना हो गया ज़माना नहीं देखा। तेरी बाहों के सिवा ठिकाना नहीं...
Read moreDetailsएक शाम कभी ऐसी हो, जहा बिते दिन की कोई बात ना हो, बस में, ओर मेरे साथ सिर्फ तुम...
Read moreDetailsमैं वह अहिल्या हूं जिसे किसी राम का इंतजार नहीं ! मै पाषाण थी पाषाण हीं रहना चाहती हूं !...
Read moreDetailsतुम्हारे साथ बीते.... अरे.. मतलब की महसूस किये हर एक पल याद रहेगे.. तुम मुझे मिल भी सकोगे ऐसी मुझे...
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