तुम उसे ही देखते रहे जो तुम्हें देखता ही नहीं।
तुम्हारे साथ होकर भी जो तुम्हें मिलता ही नहीं।।
मुस्कुराकर कहते हो जीवन में कोई गम नहीं।
जो दिल से देखते है उनसे हाल छुपता ही नहीं।।
यही हमारी खूबी है और सब से बड़ी खामी भी।
हम उन्हें भी पढ़ लेते है जो हमें पढ़ता ही नहीं।।
एक हम है की पूरा जीवन उनपे खर्च कर दिया।
और वो है की उन्हें कोई फर्क पड़ता ही नहीं।।
और क्या बताएं तुम्हें क्या है हालेदिल जनाब।
इश्क का है जादू जो देखकर भी देखता ही नहीं।।
उनकी यादों का साथ है तो सफर इतनी हसीन है।
गर साथ ना होता मंज़िल की ओर बढ़ता ही नहीं।।
बेवफा अश्क ने खोल दिया सारा राज़ उनका।
वरना किसीको उनके बारे में पता चलता ही नहीं।।
दिपेश शाह





















